Wednesday, September 10, 2014
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औरत यानि समाज की इज्ज़त
***औरत यानि समाज की इज्ज़त*** तू प्रेम में राधा बनी , गृहस्थी मे बनी जानकी..... अब तू भी अपना रूप बदल ..... कि अब बात है तेरे सुरक्षा और सम्...
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....... ایم جے راھی اسکی آنکھوں میں محبّت کی کمی دیکھی ہے جسکی خاطر میری آنکھوں نے نمی دیکھی ہے www.facebook.com/mjrahi
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. आदर्श _ प्रेम रात लग-भग आधी गुज़र चुकी थी, मोहल्ले के तमाम नव...
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इस साल को मैं तन्हाई मॆं खुशयों के गीत सुनाऊंगा ख्वाब जो बिखरे फिरते हैं चुन चुन कर उसे सजाउँगा तू खुशबू हवा मॆं घोल ज़रा , खामोश न रह क...

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